Indian History

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 Indian History, इतिहास विशेष रूप से दो अर्थों में उपयोग किया जाता है। प्राचीन या पिछली घटनाएं और दूसरी उन घटनाओं की धारणा। इतिहास शब्द का अर्थ है “यह निश्चित था”। ग्रीस के लोगों ने इतिहास के लिए ” हिस्तरी ” शब्द का इस्तेमाल किया। “इतिहास” का शाब्दिक अर्थ ” बुनना ” है। यह अनुमान लगाया जाता है कि ज्ञात घटनाओं को एक व्यवस्थित तरीके से बुनने की कोशिश की गई थी ताकि एक तस्वीर पेश की जा सके जो सार्थक और अच्छी तरह से प्रलेखित हो।

इतिहास History का आधार एवं स्रोत

किसी भी इतिहास को जानने के लिए तीन चीजों के साक्ष्य की आवश्यकता होती है,

  • व्यक्ति
  • स्थान
  • समय

उपरोक्त चीजों के माध्यम से हम इतिहास को जानते हैं. अगर उक्त तीन चीजों मे से कोई भी गायब है तो उसे इतिहास नहीं कहा जा सकता है।

इतिहास का क्षेत्र

  • सैन्य इतिहास
  • धर्म का इतिहास
  • सामाजिक इतिहास
  • आर्थिक इतिहास
  • सांस्कृतिक इतिहास
  • राजनयिक इतिहास
  • विश्व इतिहास

इतिहास का काल विभाजन (Indian History)

इतिहास को तीन भागों में बाॅटा गया है। जिसका विवरण निम्नवत है।

1. प्रागैतिहासिक काल       2. आधैतिहासिक काल      3. ऐतिहासिक काल

1-प्रागैतिहासिक काल (Prehistoric era)

मानव की उत्पति से 3000 ई0 पूर्व तक का समय प्रागैतिहासिक काल माना जाता है। इस काल में मानव को किसी भी प्रकारण की लिपि का ज्ञान नही था । तथा किसी भी प्रकार लिखित दस्तावेज प्राप्त नहीं हुये है।

पाषण काल (Paleolithic) ( पुरा पाषाण काल , मध्य पाषणकाल, नव पाषणकाल )

भारत में सर्वप्रथम रार्बट बुस्र फुट ने 1863 ई0 में पाषण कालीन सभ्यता की खोज की गयी थी। पाषण काल में कर्वाटजाइट पत्थर का प्रयोग उपकरणों बनाने के लिये किया गया था।

1- पुरा पाषाण काल

( निम्न पुरा पाषाण काल , मध्य पुरा पाषाण काल , उच्च पुरा पाषण काल )

I- निम्न पुरा पाषाण काल

  •              मानव जीवन बर्बर अस्थिर एंव शिकार कर भोजन संग्रहीत करते थे।
  •          उपकरण- हैण्ड एैक्स, चापर चाॅपिग एंव पेबुल।

चाॅपर चाॅपिग एंव पेबुल संस्कृति –

  • स्थान- पाकिस्तान के पंजाब में सोहन नदी घाटी (इसी कारण इस संस्कृति का नाम सोहन संस्कृति भी कहा जाता है।
  •      मुख्य स्थल-पिण्डी गेब है।
  •    उपकरण- पेबुल उपकरण तथा चाॅपर चाॅपिग उपकरण

हैण्ड एक्स संस्कृति –

  • स संस्कृति का मुख्य उपकरण हैण्ड एक्स था, जिस कारण इसे हैण्ड एक्स संस्कृति भी कहा जाता है।
  • इसे एश्यूलन के नाम से भी जाना जाता है।
  • उपकरण- अन्तिरम्पमकम

II- मध्य पुरा पाषाण काल

  •   पत्थर के फलक की सहायता से उपकरणों का निर्माण किया गया । इस संस्कृति को फलक संस्कृति के नाम से भी जाना जाता है। 
  • इस समय के  सर्वाधिक विशिष्ट उपकरण- स्क्रेपर बेधक तथा अन्य उपकरण बेधनिया, खुरचनी आदि थे।

III- उच्च पुरा पाषण काल

  • इसी काल मंे आधुनिक ज्ञानी मानव का उदय होना प्रारम्भ हुआ है।
  • इस काल में मानव मानव ने उपकरण बनाने हेतु पत्थर के ब्लैड, सर्वप्रथम हड्डी, हाथी दाॅत, जानवरों के सींगों का प्रयोग शुरू हुआ।
  • इस काल की इलाहाबाद के समीप बेलनघाटी के लोहंदा से हड्डी से बनी नारी की मूर्ति प्राप्त हुयी ।
  •    मानव ने इस काल में चित्रकारी करना प्रारम्भ किया, भीमबेटका की गुफाओं की चित्रकारी इस काल के बने हुये चित्र प्राप्त हुये है।

2- मध्य पाषण काल

  •   इस काल में जलवायु परिवर्तनो ने इस संस्कृति के विकास का प्रभावित किया । इस समय की गर्म जलवायु की वजह से बर्फ की जगह घास से भरे मैदानों का उगना प्रारम्भ हुआ। जिस कारण इस काल में खेती एंव पशुपालन का कार्य शुरू हुआ । मध्य पाषण काल के पा्रचीन ज्ञात स्थल – सराय नाहर राय, महदहा (प्रतापगढ) है।
  • पुशपुालन के प्राचीनतम साक्षय मध्य प्रदेश के आदमगढ और राजस्थान के बागौर से प्राप्त हुये है। प्रथम पालतु पशु- कुत्ता एंव पालतू मवेशी -भेड़ बकरी थे।
  • इस काल में उपकरणों में पे्रक्षापास्त्र तकनीकी का विकास हुआ, जिसमें की तीर कमान प्रमुख था। तीर के नोक इस युक्त विशिष्ट उपकरण था। जिसे सूक्ष्म पाषण उपकरण (माइक्रोलिथ) कहा गया ।
  • इस काल से मानव कंकाल प्र्राप्त हुये हैं। जिसमें सराय नहार राय से 15 मानव कंकाल, लाद्यैनाथ से 14 कब्रें, लेखाहिया से 17 मानव कंाकल एंव महादाह से 28 क्रब व 35 गढ़ढे वाले राख एंव हड्डियों युक्त चूल्हे प्राप्त हुये है।
  • दमदमा नामक स्थान से अभी तक 41 कबे्र प्राप्त हुयी है जिसमें से 05 कब्र जोडों में थी।

3- नव पाषण काल (Neolithic era)

इस संस्कृति का प्रारम्भ 9000 ई0 पूर्व में पश्चिम एशिया में हुआ था। कृषि एंव पशुपालन के महत्वपूर्ण तथ्य इस काल से प्राप्त हुये है।

  • कृषि का पहला एंव स्पष्ट साक्ष्य नव पाषण युगीन बस्ती मेहरगढ (पाकिस्तान) से प्राप्त हुये है।
  • भारत में इलाहाबाद के नजदीक कोल्डीहवा से चावल के प्रथम साक्ष्य प्राप्त हुये है।
  • नवपाषण काल में मानव जीवन एंव सभ्यता में अनेक परिवर्तन आये इसी कारण इस काल को भू-वैज्ञानिक गार्डन चाइल्ड ने नव पाषण का की क्रान्ति कहा है।।
  • कश्मीर में जिस नव पाषण काल का विकास हुआ उसे कश्मीरी नवपाषण संस्कृति के नाम से जाना जाता है।
  • कश्मीरी नव पाषण संस्कृति का प्रथम खोजा गया स्थल बुर्जहोम हैै। अतः इसे बुर्जहोम की संस्कृति भी कहा जाता है। बर्जुहोम से मानव के साथ कुत्ते को दफनाने के साक्ष्य प्राप्त हुये है।
  • नव पाषण काल में मृदभाडों का प्रयोग शुरू हुआ। चापानीमाडों नामक स्थल से पा्रचीनतम मृदभाडों के साक्ष्य प्राप्त हुये है।

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ताम्र पाषाण काल

मानव ने पत्थर के उपकरणों के साथ साथ तांबे का प्रयोग शुरू किया,उसी काल को तांब्र पाषाण काल कहते हैं. उस काल मैं कृषि व पशुपालन मुख्य व्यवसाय था. एवं शिकार का भी महत्व था

इस संस्कृत को दो भागों मै बॉंटा जाता है ा

१- पूर्व सैंधव ताम्र पाषाणिक सांस्कृत्

२- उत्तर सैंधव ताम्र पाषाणिक सांस्कृत्

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